नवल पाण्डेय (News Nnc24)
नई दिल्ली। दिल्ली में गरीबों के लिए सब्सिडी वाले चावल की खरीद और वितरण को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की भाजपा सरकार पर करीब 22 हजार करोड़ रुपये के कथित चावल घोटाले का आरोप लगाया है। हालांकि, ये आरोप अभी राजनीतिक दावे हैं और इनके सत्यापन के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। मामले को लेकर दिल्ली विधानसभा में भी जोरदार हंगामा हुआ। विपक्ष ने सरकार से इस पूरे प्रकरण पर जवाब और पारदर्शी जांच की मांग की। 11 अगस्त को विधानसभा में हुए हंगामे के दौरान AAP के आठ विधायकों को सदन से बाहर भी किया गया।

सरकार का रुख स्पष्ट
विवाद के बीच खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए संबंधित नेताओं को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस पूरे मामले में पारदर्शिता कायम रखने की है। गरीबों के हिस्से का खाद्यान्न सीधे पात्र लोगों तक पहुंचना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
आरोप नहीं, जांच से सामने आएगा सच
चावल घोटाले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच और दस्तावेजों के आधार पर ही निकाला जा सकता है। सरकार यदि पूरे मामले के रिकॉर्ड सार्वजनिक कर जांच की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाती है, तो इससे विपक्ष के सवालों का जवाब देने के साथ-साथ जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।फिलहाल दिल्ली की राजनीति में चावल विवाद बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और सरकार इस पूरे मामले में आगे क्या कदम उठाती है।
दिल्ली से पत्रकार नवल किशोर पांडे की पूरी रिपोर्ट
