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बेखौफ दबंगों ने जोता पुराना चकमार्ग, पीड़ित ने डीएम को दिया शिकायती पत्र 

ग्राम प्रधान ने भी उपजिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर किया कार्यवाही की मांग

एन.के मौर्य (चीफ एडीटर)

गोंडा। जिले के चर्चित भ्रष्ट लेखपाल राम नारायण बिंद के कारनामे किसी से छिपे नही हैं। चर्चा है कि रिश्वत खोरी इनके आदत में शुमार है। 25 हजार रुपयों की मांग के चलते इन्हें एक बार डीएम गोंडा द्वारा सस्पेंड भी किया जा चुका है, मगर ये जल्दी बहाल भी हो गए और दोबारा पीड़ितों की दुश्वारियां बढ़ाने में अपनी भूमिका अदा जरने लगे। इस लेखपाल को न तो उच्चधिकारियों का डर है और न ही सीएम योगी के गाज गिरने का खौफ़ है।

पूरा प्रकरण मनकापुर के ग्राम महादेवा के खत्रिया गांव से जुड़ा है। यहां के निवासी मेवालाल पुत्र भगेलू प्रसाद ने कुछ दिनों पहले जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर उसमे यह दर्शाया था कि उसके चक के उत्तर तरफ एक चकमार्ग है। जो काफी दिनों से सुचारू रूप से चालू है। जिस पर एसडीएम के आदेश पर सन 2017 में गाटा  संख्या 898  0.053 में स्थित चक मार्ग पर ग्राम प्रधान द्वारा मिट्टी पटाई का कार्य कराया गया था। 

2023 में भी वर्तमान ग्राम प्रधान सोभा राम ने मनरेगा के तहत इस चक मार्ग पर मिट्टी पटाई का कार्य कराया है। जो राजाराम पुत्र गोवर्धन को नागवार गुजरा , आलम यह है कि राजाराम उप जिलाधिकारी  से आदेश लेकर मूल चक मार्ग को इधर से उधर कराने पर तुला हुआ है। मेवालाल के भाई संचित मौर्य का कहना है कि सन 2017 में राजाराम के ही द्वारा आदेश लाने पर तत्कालीन कानूनगो परशुराम सिंह व लेखपाल  शिव कुमार शर्मा की मौजूदगी में गाटा संख्या 898  0.053 पर चकमार्ग को नपवाकर ग्राम प्रधान द्वारा पटवाय गया था। उसके बाद दोबारा फिर कानूनगो सरबजीत सिंह द्वारा उसे नपवाय गया, जिन्होंने पुराने नाप को सही माना था। संचित ने बताया कि बाद मे राजाराम को ही यह चक मार्ग खटकने लगा और उसे वहां से हटाने के लिए शासन प्रशासन के आंखों में धूल झोंककर पुराना चकरोट व उसका गाटा संख्या न दर्शाकर उपजिलाधिकारी तरबगंज से आदेश ले आया और चक मार्ग को हटवाने पर आमादा हो गया। दबंगो की दबंगई यहां खत्म नही होती, सन 2023 में जब वर्तमान ग्राम प्रधान सोभाराम ने भी इस मार्ग को पटवाया तो राजाराम व संतोष को संतोष न हुआ और किसी तरह से उपजिलाधिकारी तरबगंज से आदेश लेकर कानूनगो व वही चर्चित लेखपाल राम नारायण बिंद से चकमार्ग को नपवाकर अलग करने पर उतारू हो गया।

संचित मौर्य का आरोप है कि ये वही लेखपाल है जिसने इस चक मार्ग को 2023 में ओके किया था, मगर आज उसी चकमार्ग को खिसकाने में जुटे हैं। संचित का ये भी आरोप है कि लेखपाल व क़ानून गो उत्तर की तरफ से न नापकर इस चक मार्ग को दक्षिण से नाप कर गलत जगह पर ले जाते हैं। साथ ही शासन प्रशासन को गुमराह करने में जुटे हुए हैं।  बहरहाल चक मार्ग पर हुई मिट्टी पटाई को विपक्षियों ने ट्रैक्टर से जुतवा डाला है। जबकि ग्राम प्रधान द्वारा इस कार्य के बजट में आये सरकारी रुपये भी निकाले जा चुके हैं। इस तरह चक मार्ग को जोतकर सरकार को पलीता लगाया गया है। ग्राम प्रधान ने इसकी शिकायत उप जिलाधिकारी से की है। इस संदर्भ में जब  वर्तमान लेखपाल से बात हुई तो उन्होंने कहा कि मैंने पहले इसे नही पटवाया है। जबकि संचित का कहना है कि लेखपाल राम नारायण बिंद की मौजूदगी में यह पटा था। अब इसी लेखपाल का कहना है कि चक मार्ग गलत जगह पर है। जबकि पुराने लेखपाल शिव कुमार का कहना है कि चक मार्ग बिल्कुल सही स्थान पर निकाला गया था। यहां हैरानी की बात तो यह है कि राजस्व विभाग की टीम ने पुलिस टीम के साथ पहुंचकर वर्तमान ग्राम प्रधान की गैर मौजूदगी मे बिना पीड़ित के ही विपक्षियों से सुलह लगाकर चक मार्ग को वहां से हटाकर पीड़ित मेवालाल के चक से निकालने की कवायद में जुट गयी है। सोंचने वाली बात यह भी है कि क्या राजस्व विभाग की पुरानी टीम कानूनगो परशुराम सिंह व लेखपाल शिव कुमार शर्मा का नाप गलत था या वर्तमान क्षेत्रीय लेखपाल राम नारायण बिंद का नाप गलत है। इस संदर्भ में जब लेखपाल शिव कुमार शर्मा से बात हुई तो उन्होंने बताया कि मेरा नाप बिल्कुल सही था, चक मार्ग सही जगह पर पटा हुआ है। 

पीड़ित ने डीएम को प्रर्थना पत्र देकर फैलाया न्याय की झोली

पीड़ित संचित ने पूरे प्रकरण को दर्शाते हुए जिलाधिकारी नेहा शर्मा को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार की है। उसे पूर्ण विश्वास है कि न्याय मिलेगा। उसका कहना है कि अगर उसे यहां भी न्याय न मिला तो सीएम योगी के चौखट पर पहुंचकर न्याय की झोली फैलाएगा।

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