दिल के रोगियों पर मंडरा रहा है खतरा, तमाशबीन बने हैं जिम्मेदार

डा0 एन.के मौर्य (चीफ एडीटर)
गोंडा। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि रिहायशी इलाकों में डीजे की ध्वनि सीमित दायरे में होनी चाहिए, जिससे किसी को भी तकलीफ न हो, खासकर हार्ट के मरीजों के लिए तेज वायब्रेशन जानलेवा साबित हो सकता है बावजूद इसके वजीरगंज इलाके में डीजे मालिकों द्वारा सभी नियम कानून को ताक पर रखकर तेज आवाज में डीजे का वायब्रेशन खोल दिया जाता है जिससे हार्ट के रोगियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके कानून के रखवाले तमाशबीन बने बैठे हैं।

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि तेज आवाज में डीजे नही बजना चाहिए, तेज आवाज एक तरह का ध्वनि प्रदूषण है। जिससे कान खराब हो रहे हैं। इसमें हियरिंग लॉस का खतरा बढ़ जाता है।

डब्लू एचओ के अनुसार आने वाले समय में भारी रूप से किशोर और युवाओं में हियरिंग लॉस का खतरा है। इतना ही नही नेशनल लायब्रेरी मेडिसन के एक स्टडी के मुताबिक तीव्र ध्वनि मे कार्डियो वास्कुलर डिजीज और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है और तो और अधिक शोर से ब्लड प्रेसर और ब्लड शुगर भी तेजी से शूट अप करते हैं। जो जानलेवा साबित हो सकते हैं। आपको बता दें कि एनजीटी ने भी तेज आवाज को खतरनाक बताया है। अवगत हो कि तेज आवाज में डीजे बजाने वालों पर कार्यवाही का भी आदेश है। मगर नियम कानून को ताक पर रखकर इसे बजाने वालों को शायद कानून के रखवालों का आशीर्वाद प्राप्त है। तभी शायद ये अपनी आदत से बाज नहीं आते।
