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नाबालिग छात्रा के साथ हुए बलात्कार के मामले मे सीओ के जांच उपरांत चार दिन बाद मुकदमा दर्ज

छपिया पुलिस ने पीड़िता छात्रा का मेडिकल जांच न करा कर  घटना को बताया था कोरा झूठ

एन.के मौर्य (चीफ एडीटर)

गोंडा।  जिले के छपिया थाने मे इंसाफ के तराजू पर पीड़ितों के न्याय की सिसकियां गूंजती है। यहां रेप जैसे संगीन मामलों को भी दरकिनार करके पीड़ितों को न्याय दिलाने की बजाय उन्हें आश्वासन की घुट्टी पिलाकर उल्टे पैर वापस कर दिया जाता है। चौकी इंचार्ज से लेकर कोतवाल तक मानवता को शर्मसार करके कानून से खिलवाड़ कर रहे हैं। जिसका ताजा उदाहरण तब देखने  को मिला था जब मसकनवा चौकी इंचार्ज ने तहरीर को फाड़कर रेप पीड़िता व उसकी की मां को चौकी से भगाया जबकि कोतवाल ने भी मामले को असत्य बताकर रेप पीड़िता की दुश्वारियां बढ़ाते रहे। पीड़िता ने एसपी व डीएम से मिलने के बाद डीआईजी अमित पाठक को अपना दर्द सुनाया तब जाकर सीओ की जांच उपरांत रेप के आरोपी पर पास्को एक्ट के तहत विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है।

प्रकरण छपिया थाना क्षेत्र के एक गांव का है जहां की रहने वाली एक महिला ने  गोंडा एसपी विनीत जायसवाल को दिए गए प्रार्थना पत्र में दर्शाया था कि उसका पति रोजी रोटी के लिए दिल्ली रहता है। घर पर सिर्फ चार बेटियां हैं,  जिनमे बड़ी बेटी 15 वर्ष की नाबालिक छात्रा है। महिला का आरोप है था कि  दिनांक 12 मई दिन सोमवार को उसकी नाबालिग बेटी जब खेत में लगे आम के पेड़ की  रखवाली करने गई थी, उसी वक्त वहां बगल के खेत में पानी भरने गए दबंग युवक ने उसे जबरन पटक कर उससे बलात्कार किया था, साथ ही धमकी दी थी कि अगर किसी को बताओगी की तो जान से मार देंगे। रेप पीड़िता नाबालिग बेटी ने रोते बिलखते हुए अपनी मां को सारी बात बतायी, यह सुनकर रेप पीड़िता की मां के होश उड़ गए। उसने मसकनवा पुलिस चौकी में जाकर पूरी वारदात की तहरीर दी। जिसे देख चौकी इंचार्ज बौखला उठे और उसके तहरीर को फाड़ते हुए उसे भाग दिया था। पीड़िता ने तत्पश्चात छपिया थाने का रुख अख्तियार किया। जहां के थानेदार ने  कार्यवाही करने की बजाय उसे आश्वासन का घूंट पिलाकर वहां से टरका दिया।

पीड़िता के परिजन का कहना था कि थानेदार ने बाद में घटना स्थल पर पहुंचकर मामले का जायजा लिया था, मगर कार्यवाही से कतराते रहे। थक हार कर पीड़िता ने एसपी विनीत जायसवाल के साथ ही जिलाधिकारी नेहा शर्मा के चौखट पर जाकर न्याय की गुहार की थी। मगर कोतवाल ने अपने अधिकारियों को भी गुमराह किया था। जिसे लेकर पीड़िता का न तो मेडिकल हो रहा था और न ही आगे की कार्यवाही हो रही थी। पीड़िता ने तक हार कर डीआईजी अमित पाठक के चौखट पर जाकर न्याय की गुहार की, जिसे लेकर डीआईजी ने कार्यवाही का आश्वासन दिया। फिर क्या था मनकापुर सीओ उदित नारायण पालीवालके जांचोपरांत घटना के 4 दिन बाद पुलिस ने रेप क आरोपी पर पास्को एक्ट के तहत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। 

बिना मेडिकल जांच के ही घटना को झुठलाने में जुटे थे कोतवाल

कितनी हैरानी की बात है कि एक तरफ कानून को पटरी पर लाने के लिए जहां सीएम योगी आये दिन कानून के रखवालों को सख्त हिदायत दे रहे हैं कि फरियादियों को  तत्काल न्याय दिलाया जाए, वहीं मसकनवा पुलिस चौकी का बेखौफ चौकी इंचार्ज व छपिया थाने का थानेदार कानून को अपना जागीर समझकर उससे खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। और पीड़ितों को दुश्वारियों के दल दल में धकेल कर खाकी को शर्मसार कर रहे हैं। यहां तक कि बिना मेडिकल जांच के ही आरोपियों को बेकसूर साबित करने की कवायद  में जुट जाते हैं। जिससे अपराधियों का मनोबल और भी बढ़ जाता है। ऐसे में पीड़ितों के न्याय पर कई सवालिया निशान खड़े हो जाते हैं।

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