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सावधान ! इन दो विटामिनो की कमी से हो  रहा है हार्ट अटैक

सीने में दर्द होने पर अरेरा कॉलोनी के 39 वर्षीय अजय दूबे निजी अस्पताल पहुंचे। ईसीजी और शुरुआती जांच सामान्य रहीं, लेकिन विस्तृत जांच में हार्ट की मांसपेशियों की कार्यक्षमता कमजोर और होमोसिस्टीन का स्तर काफी बढ़ा हुआ मिला। डॉक्टरों के अनुसार, इसी कारण धमनियों में थक्का बना और सीने में दर्द हुआ। इसी तरह 46 वर्षीय एक अन्य मरीज में भी हार्ट अटैक के बाद यही स्थिति पाई गई।

एम्स भोपाल, हमीदिया अस्पताल और निजी अस्पतालों की कार्डियोलॉजी ओपीडी में आने वाले मरीजों की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। यहां हर 10 में से 8 मरीजों में विटामिन डी और बी12 की कमी पाई जा रही है। यही कमी होमोसिस्टीन बढ़ाकर दिल, दिमाग और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा रही है।

यह अलार्म है, अब सतर्क होना जरूरी

गांधी मेडिकल कॉलेज से संबंध हमीदिया अस्पताल के हृदय रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. राजीव गुप्ता के अनुसार, 70 से 80 प्रतिशत मरीजों में विटामिन डी व बी12 का स्तर सामान्य से काफी कम है। यह समस्या अब बुजुर्गों तक सीमित नहीं, बल्कि 22 से 45 वर्ष के युवाओं में बढ़ रही है।

होमोसिस्टीन क्यों बन रहा जानलेवा

डॉ. राजीव गुप्ता बताते हैं कि होमोसिस्टीन की सामान्य सीमा 5 से 15 माइक्रोमोल प्रति लीटर होती है। 50 से ऊपर पहुंचना बेहद खतरनाक है। हार्ट अटैक के करीब 60 प्रतिशत मामलों में इसका स्तर बढ़ा हुआ मिलता है।

नॉर्मल टेस्ट भी दे सकते हैं धोखा: जीएमसी के प्रोफेसर डॉ. अजय शर्मा के अनुसार ईसीजी, ईको और ट्रेडमिल टेस्ट तब ब्लॉकेज पकड़ते हैं, जब वह 80 प्रतिशत से अधिक हो। 20-30 प्रतिशत के ‘वलनरेबल ब्लॉक’ नॉर्मल दिखते हैं, लेकिन अचानक तनाव में फटकर कार्डियक अरेस्ट का कारण बन जाते हैं।

फिर विटामिन-डी और बी12 की चर्चा क्यों ?

चिकित्सकीय अध्ययनों में यह बार-बार सामने आया है कि विटामिन-डी की कमी हृदय की मांसपेशियों की कार्यक्षमता घटाती है। अतालता (अरिथिमिया) का जोखिम बढ़ाती है। होमोसिस्टीन बढ़ाती है। इससे धमनियों को नुकसान और अचानक हृदयघात का खतरा बढ़ता है।

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