LATEST NEWS
थाना कर्नलगंज पुलिस ने चोरी के माल की खरीद-फरोख्त में संलिप्त आरोपी अभियुक्त को किया गिरफ्तार
माँ सम्मय माता मंदिर मे श्रद्धालुओं ने दिया स्वच्छता मे श्रमदान, चमकाया मंदिर परिसर
पत्नी कि हत्या कर उसका शव जलाने वाले पति को नवाबगंज पुलिस ने किया गिरफ्तार
दिव्यांग महिला की जमीन पर दबंगों की नजर, 1090 पर शिकायत के बाद भी नहीं हटा कथित अतिक्रमण
कर्नलगंज पुलिस ने आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के आरोपी अभियुक्त को किया गिरफ्तार
थाना नवाबगंज पुलिस ने अवैध तमंचे के साथ 01 अभियुक्त को किया गिरफ्तार
हर घर तिरंगा अभियान मे आकांक्षा द्विवेदी ने हासिल किया प्रथम स्थान
दिल्ली में 22 हजार करोड़ के चावल घोटाले पर सियासत तेज, रेखा गुप्ता सरकार ने मांगा जवाब और जांच
तरबगंज जनप्रिय विधायक प्रेम नारायण पाण्डेय : जनसेवा और विकास के संकल्प का नाम

सावधान ! इन दो विटामिनो की कमी से हो  रहा है हार्ट अटैक

सीने में दर्द होने पर अरेरा कॉलोनी के 39 वर्षीय अजय दूबे निजी अस्पताल पहुंचे। ईसीजी और शुरुआती जांच सामान्य रहीं, लेकिन विस्तृत जांच में हार्ट की मांसपेशियों की कार्यक्षमता कमजोर और होमोसिस्टीन का स्तर काफी बढ़ा हुआ मिला। डॉक्टरों के अनुसार, इसी कारण धमनियों में थक्का बना और सीने में दर्द हुआ। इसी तरह 46 वर्षीय एक अन्य मरीज में भी हार्ट अटैक के बाद यही स्थिति पाई गई।

एम्स भोपाल, हमीदिया अस्पताल और निजी अस्पतालों की कार्डियोलॉजी ओपीडी में आने वाले मरीजों की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। यहां हर 10 में से 8 मरीजों में विटामिन डी और बी12 की कमी पाई जा रही है। यही कमी होमोसिस्टीन बढ़ाकर दिल, दिमाग और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा रही है।

यह अलार्म है, अब सतर्क होना जरूरी

गांधी मेडिकल कॉलेज से संबंध हमीदिया अस्पताल के हृदय रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. राजीव गुप्ता के अनुसार, 70 से 80 प्रतिशत मरीजों में विटामिन डी व बी12 का स्तर सामान्य से काफी कम है। यह समस्या अब बुजुर्गों तक सीमित नहीं, बल्कि 22 से 45 वर्ष के युवाओं में बढ़ रही है।

होमोसिस्टीन क्यों बन रहा जानलेवा

डॉ. राजीव गुप्ता बताते हैं कि होमोसिस्टीन की सामान्य सीमा 5 से 15 माइक्रोमोल प्रति लीटर होती है। 50 से ऊपर पहुंचना बेहद खतरनाक है। हार्ट अटैक के करीब 60 प्रतिशत मामलों में इसका स्तर बढ़ा हुआ मिलता है।

नॉर्मल टेस्ट भी दे सकते हैं धोखा: जीएमसी के प्रोफेसर डॉ. अजय शर्मा के अनुसार ईसीजी, ईको और ट्रेडमिल टेस्ट तब ब्लॉकेज पकड़ते हैं, जब वह 80 प्रतिशत से अधिक हो। 20-30 प्रतिशत के ‘वलनरेबल ब्लॉक’ नॉर्मल दिखते हैं, लेकिन अचानक तनाव में फटकर कार्डियक अरेस्ट का कारण बन जाते हैं।

फिर विटामिन-डी और बी12 की चर्चा क्यों ?

चिकित्सकीय अध्ययनों में यह बार-बार सामने आया है कि विटामिन-डी की कमी हृदय की मांसपेशियों की कार्यक्षमता घटाती है। अतालता (अरिथिमिया) का जोखिम बढ़ाती है। होमोसिस्टीन बढ़ाती है। इससे धमनियों को नुकसान और अचानक हृदयघात का खतरा बढ़ता है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top