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क्षेत्र मे चर्चाओं का बाजार गर्म, योगी के मंशा पर पानी फेरने वाले ये सिपाही हैं या “कमाऊ पूत”

एन.के मौर्य (चीफ एडिटर)

गोण्डा। सरकार की छवि को धूमिल करने मे उन दिनों जिले का वजीरगंज थाना सबसे आगे है। यहाँ जिम्मेदारों की निष्क्रियता के चलते पुलिस वाले नियम कानून को फुटबॉल बनाकर खेलते हैं। इस थाने मे थानेदार व सिपाहियों द्वारा दबंगों से मिलकर पीड़ितों का आये दिन शोषण होता है। तमाम मामले उजागर होने के बावजूद इन पर कोई कार्यवाही नही होती, बल्कि अन्य लोगों का तबादला कर दिया जाता है जबकि इन्हे आजाद पंक्षी की तरह मनमानी उड़ान भरने के लिए छोड़ दिया जाता है। जिसके चलते क्षेत्र के पीड़ित डरे सहमे रहते हैं वो थाने मे जाने से कतराते हैं। 

एस.ओ विपुल पाण्डेय

अवगत हो कि आये दिन पीड़ित थाने की शिकायत एसपी व आईजी से करते हैं बावजूद इसके इन्हे कुछ नही होता, चर्चा है की जांच की आंच मे गलत आख्या से ये बच जाते हैं। हम बात करें अगर थानेदार की तो वजीरगंज थाने के चर्चित थानेदार विपुल पाण्डेय के कारनामे किसी से छिपे नही हैं। जब से बड़गाँव पुलिस चौकी से आये हैं तभी से पीड़ितों का जीना मुहाल है। बात इन्ही तक नही है चर्चा है कि यहाँ का एक बेलगाम सिपाही सुशील सिंह 7 वर्षों से तीसरी पोस्टिंग पर टिका है। जिसके द्वारा क्षेत्र मे कई लोगों को कमाई का माध्यम बनाकर धन उगाही की जाती है।

सिपाही सुशील सिंह

क्षेत्र मे चर्चा है कि कोंडर, कादीपुर हलके मे इसके व थानेदार के मिलीभगत से जहरीली शराब कि भी बिक्री तेजी से होती है। जिसका वीडियो भी वायरल हो चुका है। जिसमे जहरीली शराब बेचने वाला खुद कह रहा था की हल्का सिपाही द्वारा उससे 4 हजार रुपये लिए जाते हैं जबकि बंद करने पर थाने पर 5 हजार लेकर छोड़ा जाता है, इसके बावजूद त्यौहारी अलग से लिया जाता है। कितनी हैरानी की बात है कि इतना कुछ सामने आने के बाद भी जिम्मेदार एक्शन मे नही आये. परिणाम स्वरुप चर्चा है कि आज भी ये धंधा जोरों पर है।

दीवान विनोद सोनी

अब लें चलते हैं थाने के दीवान विनोद सोनी कि तरफ तो ये लगभग 4वर्षों से अपना अंगद रुपी पैर जमाये बैठे हैं। इन पर गाज़ गिरी न है 7 सालों से कुंडली मारकर बैठने वाले सुशील सिंह टस से मस हुए। तमाम लोगों को ट्रांसफर करके इधर उधर किया जाता है मगर जो सिपाही दागी हैं उन्हें आजाद पंक्षी कि तरह पीड़ितों कि दुश्वरियां बढ़ाने के लिए छोड़ दिया जाता है। जिससे जिम्मेदारों कि साख पर भी न केवल भारी बट्टा लग रहा है बल्कि कानून व्यवस्था भी चरमरा गई है। क्षेत्र मे भारी चर्चा का विषय है कि लोग आते हैं लोग जाते हैं मगर 7 वर्षों से घूम फिर कर तीसरी पोस्टिंग पर टिके रहने वाले सिपाही व दीवान पर आखिर इतनी बड़ी मेहरबानी क्यों है ?  इन्हे लेकर लोग दबी जुबान से ये भी कह रहे हैं कि ये सिपाही हैं या कमाऊ पूत हैं, जिनके लिए सारे नियम कानून धरे के धरे रह जाते हैं। काश सीएम योगी व किसी सक्षम अधिकारी की निगाह यहाँ पड़ती जहां हाकिमो के मेहरबानी के चलते कानून व्यवस्था पटरी से उतरती जा रही है।

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