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डीआईजी की फटकार के बाद हरकत में आई वजीरगंज पुलिस, होमगार्ड व अधिवक्ता समेत चार पर दर्ज हुआ धोखाधड़ी का मुकदमा

छह साल तक भटकने के बाद जनसुनवाई में डीआईजी के सख्त तेवर के बाद दर्ज हुआ एफआईआर

एन.के मौर्य (चीफ एडिटर)

गोंडा। छह वर्ष तक पुलिस और अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद आखिरकार एक पीड़ित को तब न्याय की उम्मीद जगी, जब उसने देवीपाटन परिक्षेत्र के डीआईजी अशोक कुमार शुक्ल की जनसुनवाई में अपनी फरियाद रखी। शिकायत सुनते ही डीआईजी ने मौके से ही वजीरगंज थाना प्रभारी को फोन कर कड़ी फटकार लगाई और तत्काल मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। डीआईजी की सख्ती के बाद पुलिस ने होमगार्ड, एक अधिवक्ता समेत चार लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।

मामला वजीरगंज थाना क्षेत्र का है। जहां के निवासी लल्लन चौहान का आरोप है कि थाने के होमगार्ड चंद्रप्रकाश ने अपने परिचित लल्लन चौहान को अनुसूचित जाति के व्यक्ति की भूमि दिलाने का भरोसा दिया। इसके एवज में लल्लन चौहान से लगभग तीन लाख रुपये संबंधित खातों में जमा कराए गए। पीड़ित का आरोप है कि पूरी रकम देने के बावजूद जमीन उसके नाम कराने के बजाय किसी अन्य व्यक्ति के नाम बैनामा कर दी गई। शिकायत के अनुसार, बाद में एक अधिवक्ता के माध्यम से भूमि विक्रय की अनुमति भी प्राप्त कर ली गई, लेकिन इसी प्रक्रिया में कथित रूप से पूरा खेल हो गया और जमीन दूसरे के नाम स्थानांतरित कर दी गई। आरोप यह भी है कि वर्ष 2024 में विवादित भूमि का कुछ हिस्सा स्वयं होमगार्ड ने अपने नाम बैनामा करा लिया।

पीड़ित का कहना है कि धोखाधड़ी सामने आने के बाद उसने वजीरगंज थाने, क्षेत्राधिकारी तरबगंज और पुलिस कार्यालय तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। इस बीच होमगार्ड और पीड़ित के बीच समझौते की कोशिश भी हुई, जिससे मामला दब गया, लेकिन जमीन वापस नहीं मिली। शुक्रवार को जनसुनवाई में जब लल्लन चौहान ने डीआईजी के सामने पूरी आपबीती सुनाई तो डीआईजी ने थाना प्रभारी से कड़े शब्दों में पूछा कि “पीड़ित के साथ इतनी बड़ी धोखाधड़ी हुई, फिर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?” उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि आरोपियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। सूत्रों के अनुसार डीआईजी ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई में लापरवाही बरती गई तो जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

डीआईजी के आदेश के बाद वजीरगंज थाना प्रभारी विपुल पांडेय ने ननकुन, सुदामा देवी, होमगार्ड चंद्रप्रकाश तथा एक अधिवक्ता के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस कार्रवाई की पूरे पुलिस महकमे में चर्चा है। छह वर्षों तक कार्रवाई न होने और डीआईजी के एक आदेश के बाद तत्काल एफआईआर दर्ज हो जाने से स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि विवेचना कितनी निष्पक्ष और प्रभावी होती है तथा पीड़ित को वास्तविक न्याय कब तक मिल पाता है।

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