पीड़िता की मां पहुंची डीएम व एसपी के दरबार, लगाया न्याय की गुहार

एन.के मौर्य (चीफ एडीटर)
गोंडा। जिले के छपिया थाने मे रेप जैसे संगीन मामलों को भी दरकिनार करके पीड़ितों को न्याय दिलाने की बजाय उन्हें आश्वासन की घुट्टी पिलाकर उल्टे पैर वापस कर दिया जाता है। यहां चौकी इंचार्ज से लेकर कोतवाल तक मानवता को शर्मसार करके कानून से खिलवाड़ कर रहे हैं। मसकनवा चौकी इंचार्ज ने तहरीर को फाड़कर रेप पीड़िता की मां को चौकी से भगाया जबकि कोतवाल ने आश्वासन की घुटी पिलाकर उसे थाने से टरकाया। दबंगों से डरी सहमी पीड़िता ने अब एसपी के चौखट पर जाकर न्याय की गुहार की है।

प्रकरण छपिया थाना क्षेत्र के एक गांव का है जहां की रहने वाली एक महिला ने गोंडा एसपी विनीत जायसवाल को दिए गए प्रार्थना पत्र में दर्शाया है कि उसका पति रोजी रोटी के लिए दिल्ली रहता है। घर पर सिर्फ चार बेटियां हैं, जिनमे बड़ी बेटी 15 वर्ष की नाबालिक छात्रा है। महिला का आरोप है कि दिनांक 12 मई दिन सोमवार को उसकी नाबालिग बेटी जब खेत में लगे आम के पेड़ की रखवाली करने गई थी, उसी वक्त वहां बगल के खेत में पानी भरने गए दबंग युवक ने उसे जबरन पटक कर उससे बलात्कार किया। साथ ही धमकी दी कि अगर किसी को बताओगी की तो जान से मार देंगे। रेप पीड़िता नाबालिग बेटी ने रोते बिलखते हुए अपनी मां को सारी बात बतायी, यह सुनकर रेप पीड़िता की मां के होश उड़ गए। उसने मसकनवा पुलिस चौकी में जाकर पूरी वारदात की तहरीर दी। जिसे देख चौकी इंचार्ज बौखला उठे और उसके तहरीर को फाड़ते हुए उसे भाग दिया। पीड़िता ने तत्पश्चात छपिया थाने का रुख अख्तियार किया। जहां के थानेदार ने कार्यवाही करने की बजाय उसे आश्वासन का घूंट पिलाकर वहां से टरका दिया।

पीड़िता के परिजन का कहना है कि थानेदार ने बाद में घटना स्थल पर पहुंचकर मामले का जायजा लिया था, मगर कार्यवाही से कतराते रहे। थक हार कर पीड़िता ने एसपी विनीत जायसवाल के साथ ही जिलाधिकारी नेहा शर्मा के चौखट पर जाकर न्याय की गुहार की। जहां एसपी द्वारा कार्यवाही का आश्वासन दिया गया है। आदेश । कितनी हैरानी की बात है कि एक तरफ कानून को पटरी पर लाने के लिए जहां सीएम योगी आये दिन कानून के रखवालों को सख्त हिदायत दे रहे हैं कि फरियादियों को तत्काल न्याय दिलाया जाए, वहीं मसकनवा पुलिस चौकी का बेखौफ चौकी इंचार्ज व छपिया थाने का थानेदार कानून को अपना जागीर समझकर उससे खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। और पीड़ितों को दुश्वारियों के दल दल में धकेल कर खाकी को शर्मसार कर रहे हैं। अब देखना तो यह है कि डरे सहमे पीड़िता को कहां तक न्याय मिल पाता है। इस संदर्भ में जब थानेदार से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कहा कि मैं अभी मीटिंग में हूं, कुछ देर में फोन करता हूँ। बहरहाल खबर लिखे जाने तक थानेदार से दोबारा बात नहीं हो पाई है।
