दिल्ली में मुफ्त यात्रा की दंश झेलती महिलाएं आखिर कब तक पीती रहेंगी अपमान का घूंट

नवल पांडेय (एडीटर)
दिल्ली। इन दिनों दिल्ली में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। जहां देखो वहां ही दुश्वारियों का सैलाब उमड़ा हुआ है। बस स्टैंड हो या फिर अस्पताल, हर जगह दुश्वारियों का मंजर दिखाई देता है। सुविधा के नाम पर लोगों को छला जा रहा है।
बताते चलें कि सरकार द्वारा यहां भले ही महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा करने की सुविधा दी गई है। सच तो यह है कि इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए महिलाओं को तमाम दुश्वारियां झेलनी पड़ती है। इस बात का खुलासा पर्यावरण निगरानी संस्था ग्रीनपीस के एक सर्वे रिपोर्ट में हुआ है। सर्वे के मुताबिक, दिल्ली की बसों में महिला यात्रियों को मुफ्त यात्रा की सुविधा पाने के लिए ड्राइवरों और कंडक्टरों के साथ ही पुरुष यात्रियों द्वारा भेदभाव का सामना करना पड़ता है। हालांकि, दिल्ली सरकार ने एक बयान में कहा कि उसने ऐसी शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई की है, यहां तक कि ड्राइवरों को ब्लैकलिस्ट भी किया है, और निकट भविष्य में ऐसी शिकायतों पर काबू पाने के लिए तुरंत सभी सुधारात्मक कदम उठाएगी इसका भी वादा किया है। मगर चर्चा के मुताबिक धरातल पर दुश्वारियां थमने का नाम नही ले रही है।

देखने को मिलता है कि बस स्टाप बूथ पर खड़ी महिलाओं के हाथ देने के बावजूद अधिकांश ड्राईवर जल्दी बस नही रोकते। क्योंकि वो जानते हैं इनसे कुछ मिलना नही है। महिलाएं चिल्लाती रहती हैं और बस आगे निकल जाता है। इस तरह बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा का लाभ उठाने के लिए महिलाएं अपमान का घूंट पी रही हैं। कितनी हैरानी की बात है कि इस वक्त दिल्ली की सीएम भी एक महिला है। इसके बावजूद यहां महिलाओं का शोषण हो रहा है। जिसका कोई पुरसा हाल नही है।

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में नहीं मिल रहे एंटी रेबीज इन्जेक्शन, दर-दर भटक रहे मरीज
दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज इन्जेक्शन की अक्सर कमी रहती है। जिसकी वजह से मरीज परेशान हैं। सरकार से सप्लाई बाधित होने के कारण, मरीजों को बाहर से इन्जेक्शन खरीदने पड़ रहे हैं, चर्चा के मुताबिक डॉक्टर हेडगेवार अस्पताल में स्थिति गंभीर है, जहां रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं, और उन्हें निराश होकर लौटना पड़ जाता है।
