कब्जे से 02 मोबाइल फोन, 1600 रू0 नगद व 01 बाइक म बरामद
एन.के मौर्य (चीफ एडीटर)
गोंडा। जिले के तरबगंज थाना क्षेत्र के ग्राम खजुरी निवासिनी पीड़िता पूनम जायसवाल पत्नी हरिवंश ने दिनांक 06 दिसंबर 2024 को पीड़ित चन्द्र प्रताप सिंह पुत्र चित्रकेश सिंह नि0 ग्राम सुल्तानजोत पोस्ट दर्जीकुआं थाना को0 देहात द्वारा पुलिस अधीक्षक गोण्डा को जनसुनवाई के दौरान प्रार्थना पत्र दिया गया था कि उनके सीएसपी एकाउन्ट को साइबर अपराध में संलिप्ता के आधार पर फ्रीज कर दिया गया है। जिसकी जांच पुलिस अधीक्षक गोण्डा द्वारा साइबर सेल को दी गयी थी।

बताते चलें कि जांच के दौरान ज्ञात हुआ कि पीड़ित पूनम जायसवाल के ग्राहक सेवा केन्द्र पर दो व्यक्तियों द्वारा 1,00000/- रू0 आनलाइन पैसा ट्रांसफर करवाकर नगद धनराशि ले गए थे तथा पीड़ित चन्द्र प्रताप सिंह के ग्राहक सेवा केन्द्र से 55600 पीड़ितों के सीएसपी एकाउन्ट में की गयी धनराशि साइबर ठगी से सम्बन्धित थी जिसके सम्बन्ध में बिहार के पीड़ितों द्वारा साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करायी गयी थी। जिस कारण पीड़ितों का खाता फ्रीज हो गया था। साइबर सेल की जांच के उपरान्त साइबर थाने में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कराया गया था। आज दिनांक 07 दिसंबर 2024 को साइबर क्राइम थाने की संयुक्त टीम द्वारा इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों के आधार पर प्रकाश में आये दो आरोपी अभियुक्तों जीवननाथ मिश्रा उर्फ छोटू मिश्रा व कमलेश्वर मिश्रा पुत्र अयोध्या मिश्रा दो युवकों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त 01 कीपैड मोबाइल, 01 एनड्राइड मोबाइल फोन, 1600 रू0 नगद व घटना में प्रयुक्त 01 प्लेटिना मोटरसाईकिल बरामद किया गया। गिरफ्तार अभियुक्तगणों के विरूद्ध थाना साइबर क्राइम गोण्डा द्वारा विधिक कार्यवाही की गई है।
इस तरह देते थे अपराधिक कारनामों को अंजाम
अभियुक्तगण द्वारा पहले जिस राज्य में ठगी करना होता है वहां पर जाकर बिल्डिंग मैटेरियल, ईंट,भठ्ठों के मालिकों के मो0नं0 की जानकारी करते है व उनसे मिलकर अपने आपको ठेकेदार बताते हुए खरीददारी की बात कर उन्हे विश्वास में लेते है और जितने रूपये में माल की खरीददारी की बात तय होती है उससे अधिक धनराशि का कूटरचित बैंक डिपाॅजिट का मैसेज बनाकर उन्हें बैंक अवकाश के दिन भेजते है और उनसे कहते है कि गलती से आपके एकाउण्ट में तय धनराशि से अधिक पैसा चला गया है उसे आप वापस कर दीजिए। हमें किसी और को भी पैसे भेजने है।लोगों द्वारा ज्यादा पैसे साइबर अपराधियों द्वारा दिए गए क्यू0आर0कोड0 जो कि किसी न किसी सीएसपी (ग्राहक सेवा केन्द्र) का होता था उस पर भेज देते है। जिन पैसों को साइबर अपराधियों द्वारा सीएसपी (ग्राहक सेवा केन्द्र) के संचालकों से वार्ता कर उनके दोस्त द्वारा सीएसपी केंद्र के क्यू0आर0 कोड में भेजे गए पैसे बता कर निकाल लेते हैं।
