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किन्नर समाज की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने अविमुक्तेश्वरानंद पर साधा निशाना, बोली 10 मे से 9 महामंडलेश्वर झूठे

प्रयागराज : माघ मेले के गंगा स्नान को लेकर चर्चित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में अब किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी कूद पड़ी हैं। ममता कुलकर्णी ने कहा कि केवल वस्त्र पहन लेने या पद पा लेने से कोई संत नहीं बन जाता। आज 10 में से 9 महामंडलेश्वर झूठे हैं। ममता कुलकर्णी ने यह बातें IANS को दिए गए एक इंटरव्यू में कही।

इस दौरान ममता कुलकर्णी ने दो सवाल पूछे, पहला उन्हें शंकराचार्य नियुक्त किसने किया और दूसरा, करोड़ों लोगों की भीड़ में पालकी ले जाने की क्या जरूरत थी? ममता कुलकर्णी ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की वजह से उनके शिष्यों की पिटाई हुई है। अगर वह पालकी से न जाकर पैदल चले जाते तो ऐसा कुछ भी नहीं होता। लेकिन, वह जिद पर अड़े रहे। यह गुरु का आचरण नहीं होता है। गुरु का आचरण जिम्मेदारी और सौम्यता से भरा हुआ होता है। ममता कुलकर्णी ने कहा, ‘जब मैं इस आध्यात्मिक यात्रा में गहराई से उतरीं, तब मुझे कई सच्चाइयों का एहसास हुआ। बाहर से जो दुनिया बहुत पवित्र और ज्ञान से भरी हुई दिखाई देती है, अंदर जाकर देखने पर वैसी नहीं लगती। आज हर तरफ ऐसे लोग घूम रहे हैं, जो खुद को महामंडलेश्वर या जगद्गुरु घोषित कर रहे हैं, लेकिन उनके पास न तो सही ज्ञान है और न ही आत्मज्ञान।’

ममता कुलकर्णी ने धार्मिक ग्रंथों का उदाहरण देते हुए आत्मज्ञान की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘वेदों और उपनिषदों में भी सिखाया गया है कि केवल मंत्रों को याद कर लेना या शास्त्रों का ज्ञान होना ही सब कुछ नहीं है। असली ज्ञान वह है, जिससे व्यक्ति अपने भीतर की सच्चाई को समझ सके।’

अखिलेश यादव पर भी उठाए सवाल

ममता कुलकर्णी ने कहा कि, क्या अखिलेश यादव गो हत्या रोकने का वचन दे सकते हैं। क्या उस पर अखिलेश यादव कोई ठोस आश्वासन देंगे? ममता ने ऋग्वेद में ऋषि कुणाल और श्वेतकेतु के संवाद का हवाला दिया और कहा कि धर्म को राजनीति से दूर रखना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मैंने अपने आध्यात्मिक सफर में बहुत कम सच्चे संत देखे हैं। दस में से नौ लोग ऐसे मिले, जो झूठे थे और केवल पद और पहचान के पीछे भाग रहे थे। इसी अनुभव के चलते मुझे अब महामंडलेश्वर का पद एक हास्य विनोद जैसा लगने लगा है। जब हर दूसरे दिन नए महामंडलेश्वर बनाए जा रहे हों, तो ऐसे में पदों की गंभीरता अपने आप खत्म हो जाती है।’

जिन्हें बुनियादी समझ नहीं वो दे रहे ज्ञान’

किन्नर अखाड़े के संस्थापक रहे ऋषि अजय दास पर भी ममता कुलकर्णी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें धर्म, वेद और परंपरा की बुनियादी समझ भी नहीं है, लेकिन वे बड़े-बड़े मंचों से उपदेश देते हैं। नाच-गाने को लेकर टिप्पणियां करते हैं। भारतीय परंपरा में नृत्य और संगीत को कभी तुच्छ नहीं माना गया। भगवान शिव का नटराज स्वरूप और श्रीकृष्ण की लीलाएं इसके उदाहरण हैं।’

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