कानपुर के एचडीएफसी बैंक मे हुए ठाकुर बनाम ब्राह्मण के झगडे की आग सुलगती जा रही है। लोग महिला कर्मचारी आस्था सिंह पर उंगलियां उठा रहे हैं कि उसने ठाकुर होने की धमकी दी है, अगर ऐसा है तो इसमें गलत ही क्या है। चर्चा के मुताबिक आस्था सिंह से ऋतू तिवारी व उनके पति ने पहले रौब झाड़ा था, जिसे लेकर आस्था सिंह को ये बताना जरूरी हों गया कि मै ठाकुर हूँ.. ठाकुर.. सारी हेंकड़ी निकाल दूंगी।

पूरी कहानी कुछ इस तरह से है जिसे जानना जरूरी है। एचडीएफसी बैंक कर्मचारी आस्था सिंह अपनी जाति जता नहीं बल्कि बता रही है क्योंकि इसकी शुरुआत कहीं और से हुई है लेकिन इनका छोटा सा क्लिप वायरल करके सब अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। दरअसल बात यह कि ऋतु तिवारी नाम की एक महिला इसी बैंक में काम करती थी लेकिन अब नौकरी छोड़ दी। वह अपना रिलीविंग लैटर चाहती थी जिसको लेकर ऋतु तिवारी की ननद ने पहले बदतमीजी से बात की थी और उसको जवाब भी दिया गया तो दोनों विषयों को लेकर ऋतु तिवारी के पति वर्किंग आवर के बाद गुस्से में बैंक आया। बैंक पहुंचकर ऋतु तिवारी के प्रति ऋषि मिश्रा ने स्टाफ से बदतमीजी शुरू की। उक्त बैंक कर्मचारी आस्था सिंह जब समझाने का प्रयास करती है तो ऋषि मिश्रा गाली, गलौज के साथ आस्था सिंह को कहते हैं कि किस जाति की हो? हेकड़ी निकाल दूंगा। इस बात आस्था सिंह अपना आपा खो देती है और कहती ऐसी, तैसी कर दूंगी। ठाकुर हूं मैं।

बैंक कर्मचारी को सहनशील होना चाहिए था यह सत्य है लेकिन कितना? यदि विषय कामकाज को लेकर होता तो सहनशीलता और जवाबदेही जरूरी है लेकिन इसमें कोई जाति घुसेड़ दे तब क्या करना चाहिए? और उत्तर यही होगा कि जैसे को तैसा होना ही चाहिए। जातिवाद और लिंगभेद पर तो बिल्कुल भी चुप नहीं रहना चाहिए। अब जिन्हें पूरी बात नहीं पता उन्हें समझाओ कि आपकी तरह ऋषि मिश्रा को भी यही लगा कि मामला ऊंची जाति बनाम नीची जाति का है लेकिन अफसोस यह कि मामला सही और गलत का है। ऋषि मिश्रा ने जो किया, वैसा कोई भी करे तो जवाब आस्था सिंह जैसा ही होना चाहिए। इससे जिनके दिमाग में जाति का भूत है, जरूर उतरेगा।
