LATEST NEWS
वजीरगंज दरोगा के सर पर खाकी का जुनून , बोले ब्राह्मणों को देखकर खौलता है खून
छपिया मे हुईं लूट की घटना का अब तक नही खुलासा, पीड़ित ने अब एसपी से की लूट की घटना के खुलासे की मांग
ये खान सर बिहार का ‘नटवरलाल’ है, सगे चाचा ने खोली पोल, लगाए गंभीर आरोप
दिल्ली के महरौली मे भर भराकर गिरी 5 मंजिला इमारत, गोण्डा के रवि वर्मा कि हुई मौत
आईजी सर ! यहाँ तो आजाद पंक्षी कई तरह घूम रहा है पत्रकार के घर पर हवाई फायरिंग करने वाला आरोपी दबंग
पत्रकार के घर चढ़ कर हवाई फायरिंग करने वाले आरोपी पर केस दर्ज 
डीआईजी साहब ! यहाँ तो 4 वर्षों से टिके दीवान व 7 वर्षों से टिके सिपाही के करनामो से त्रस्त हैं लोग
पत्रकारिता दिवस की तैयारी को लेकर श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की बैठक संपन्न
पकड़ा गया शुभेंदु अधिकारी के PA का हत्यारा, टोल पर एक UPI पेमेंट ने खोल दी संदिग्‍ध राज सिंह की पोल

मै ठाकुर हूँ..आस्था सिंह ने ऐसा क्यों कहा ? जानिये झगड़े के सुलगती आग की वो सच्चाई जिससे आप हैं अनजान

कानपुर के एचडीएफसी बैंक मे हुए ठाकुर बनाम ब्राह्मण के झगडे की आग सुलगती जा रही है। लोग महिला कर्मचारी आस्था सिंह पर उंगलियां उठा रहे हैं कि उसने ठाकुर होने की धमकी दी है, अगर ऐसा है तो इसमें गलत ही क्या है।  चर्चा के मुताबिक आस्था सिंह से ऋतू तिवारी व उनके पति ने पहले रौब झाड़ा था, जिसे लेकर आस्था सिंह को ये बताना जरूरी हों गया कि मै ठाकुर हूँ..  ठाकुर.. सारी हेंकड़ी निकाल दूंगी। 

पूरी कहानी कुछ इस तरह से है जिसे जानना जरूरी है। एचडीएफसी बैंक कर्मचारी आस्था सिंह अपनी जाति जता नहीं बल्कि बता रही है क्योंकि इसकी शुरुआत कहीं और से हुई है लेकिन इनका छोटा सा क्लिप वायरल करके सब अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। दरअसल बात यह कि ऋतु तिवारी नाम की एक महिला इसी बैंक में काम करती थी लेकिन अब नौकरी छोड़ दी। वह अपना रिलीविंग लैटर चाहती थी जिसको लेकर ऋतु तिवारी की ननद ने पहले बदतमीजी से बात की थी और उसको जवाब भी दिया गया तो दोनों विषयों को लेकर ऋतु तिवारी के पति वर्किंग आवर के बाद गुस्से में बैंक आया। बैंक पहुंचकर ऋतु तिवारी के प्रति ऋषि मिश्रा ने स्टाफ से बदतमीजी शुरू की। उक्त बैंक कर्मचारी आस्था सिंह जब समझाने का प्रयास करती है तो ऋषि मिश्रा गाली, गलौज के साथ आस्था सिंह को कहते हैं कि किस जाति की हो? हेकड़ी निकाल दूंगा। इस बात आस्था सिंह अपना आपा खो देती है और कहती ऐसी, तैसी कर दूंगी। ठाकुर हूं मैं। 

बैंक कर्मचारी को सहनशील होना चाहिए था यह सत्य है लेकिन कितना? यदि विषय कामकाज को लेकर होता तो सहनशीलता और जवाबदेही जरूरी है लेकिन इसमें कोई जाति घुसेड़ दे तब क्या करना चाहिए? और उत्तर यही होगा कि जैसे को तैसा होना ही चाहिए। जातिवाद और लिंगभेद पर तो बिल्कुल भी चुप नहीं रहना चाहिए। अब जिन्हें पूरी बात नहीं पता उन्हें समझाओ कि आपकी तरह ऋषि मिश्रा को भी यही लगा कि मामला ऊंची जाति बनाम नीची जाति का है लेकिन अफसोस यह कि मामला सही और गलत का है। ऋषि मिश्रा ने जो किया, वैसा कोई भी करे तो जवाब आस्था सिंह जैसा ही होना चाहिए। इससे जिनके दिमाग में जाति का भूत है, जरूर उतरेगा। 

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top