मृतक का बेटा बोला, बीगो औऱ ऑक्सीजन लगाने के बजाय हंस रहे थे इमरजेंसी में तैनात कर्मचारी
नवल पाण्डेय (News Nnc24)
गोंडा जिले का मेडिकल कॉलेज और इमरजेंसी वार्ड एक बार फिर से चर्चा में है। यहाँ नियुक्त एंट्रेंड स्टाफ के चलते मरीजों को तमाम मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। इस मेडिकल कॉलेज मे जहाँ एक तरफ मरीजों के दर्द की सिसकियां उभरती हैं वहां यहाँ के अनट्रेंड बेलगाम stafon के हंसी मजाक व गालियों की आवाज़े भी गूंजती हैं। ऐसा ही एक मामला तब उजागर हुआ जब सर्वे आफ इंडिया के रिटायर्ड कर्मचारी 75 वर्षीय स्वामीनाथ की गोंडा मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में इलाज के दौरान लापरवाही के कारण मौत हो गई ।

मृतक स्वामी नाथ के बेटे संतोष का आरोप है कि उनके पिता को सांस लेने में काफी दिक्कत थी वह गोंडा मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। जहां उन्हें बीगो लगाने और ऑक्सीजन देने के बजाय वहां पर मौजूद स्टाफ हंसी औऱ ठिठोली कर रहे थे। मैं बार-बार कहता रहा लेकिन फिर भी इन लोगों ने ध्यान नहीं दिया काफी कहने के बाद जब बीगो और ऑक्सीजन लगाए तो उनकी इसी दौरान मौत हो गई है। मृतक स्वामी नाथ की बेटी संतोष ने मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में तैनात कर्मचारियों और डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले में कार्यवाही की मांग की है पिता की मौत होने के बाद बेटे संतोष से मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में तैनात कर्मचारियों और डॉक्टर से नोकझोंक भी हुई है। बताया जा रहा है कि स्वामीनाथ काफी लंबे समय से सांस के मरीज थे जिनका बेटी संतोष द्वारा गोंडा में में इलाज कराया जा रहा था और वह आज पूरे दिन में ठीक-ठाक थे अचानक शाम को उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई और बेटा जब इमरजेंसी मेडिकल कॉलेज में लेकर पहुंचा तो वहां पर लापरवाही के कारण मौत हो गई है। पीड़ित बेटे संतोष सिंह ने बताया कि मेरे पिता की हालत खराब थी मैं यहां पर लेकर आया तो डॉक्टर डीएन सिंह ने देखा भी था। दिन में वह बैंक भी गए थे उन्होंने पैसा भी निकाला था जूस भी पिया था। जब मैं यहां इमरजेंसी में लेकर आया तो यहां 5 से 6 लड़के थे वह हंस रहे थे। इन लोगों को बिगो लगाना नहीं आता है कोई कह रहा था की नस नहीं मिल रही है। तो कोई कह रहा था कि लाइए हम लगाते हैं यह लोग एक्सपीरियंस कर रहे थे। जब हमने मना किया तो इन लोगों द्वारा मेरे साथ अभद्र पूर्ण व्यवहार करते हुए मुझे मां बहन की गाली दी गई। इमरजेंसी में तुरंत मेरे पापा को एडमिट करना चाहिए लेकिन इन लोगों ने एडमिट नहीं किया है मेरे पापा की मौत हो गई मौत के बाद उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भेज रहे थे वह तो हमने देखा कि उनकी मौत हो चुकी है। वही गोंडा मेडिकल कॉलेज के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि अगर लापरवाही हुई होगी तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी लेकिन डॉक्टर और कर्मचारियों द्वारा कोई लापरवाही नहीं की गई है। डॉक्टर और कर्मचारियों द्वारा इलाज किया जा रहा था इसी दौरान हालत ज्यादा खराब होने पर इमरजेंसी में ही उनकी मौत हो गई है। अब यहाँ क्या सच है और क्या झूठ ये बता पाना मुश्किल है मगर सच तो ये भी है, कुछ तो दुश्वरियां रही होगी यूँ कोई यूँ गिला नही करता.
