उपेंद्र सिंह
करनैलगंज (गोण्डा) 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को सात अनिवार्य टीके लगाकर 12 जानलेवा बीमारियों से बचाया जा सकता है। इसके बावजूद कई परिवार टीकाकरण को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। ब्लॉक पंचायत सभागार में आयोजित कार्यक्रम में यूनिसेफ की पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया की जिला समन्वयक सुषमा द्विवेदी ने ग्राम प्रधानों व क्षेत्र पंचायत सदस्यों को संबोधित करते हुए टीकाकरण के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जिले के पांच विकास खंडों के 10-10 गांवों में सर्वे किया गया, जहां 529 परिवारों ने टीकाकरण से इंकार किया था। इनमें से 454 बच्चों को टीका छोड़ देने के बाद पुनः टीकाकरण कराया गया तथा 0 से 5 वर्ष तक के 252 बच्चों में से 166 बच्चों को टीका लगाया जा चुका है। सुषमा द्विवेदी ने बताया कि 6 सप्ताह की उम्र से शुरू होने वाले बी-ओपीवी, पेंटावैलेंट, एफ-आईपीवी, आरवीवी और पीसीवी जैसे टीके बच्चों को पोलियो, गलाघोंटू, काली खांसी, टेटनस, हेपेटाइटिस-बी, निमोनिया, रोटावायरस डायरिया और मेनिन्जाइटिस जैसी बीमारियों से बचाते हैं। इसके बाद 10 सप्ताह, 14 सप्ताह और 9-12 माह में दिए जाने वाले टीके खसरा, रुबेला, जेई, रतौंधी, पोलियो आदि से सुरक्षा प्रदान करते हैं। 16 से 24 माह तक एमआर-2, जेई-2, डीपीटी बूस्टर-1 व बी-ओपीवी बूस्टर के साथ विटामिन-ए की नियमित डोज से पांच वर्ष तक टीकाकरण पूरा होता है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र पांडेय सहित कई ग्राम प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य उपस्थित रहे।
