
नवल पांडेय (एडीटर)
गोंडा। जिले के वजीरगंज क्षेत्र के पूरे डाढू स्थित विद्युत फीडर पर इलेक्ट्रिशियन पद पर तैनात रत्नाकर पांडेय के कारनामो से विद्युत उपभोक्ताओं को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। इस बेलगाम इलेक्ट्रिशियन को न तो उच्चधिकारियों का खौफ है और न ही सीएम योगी के गाज गिरने का डर है।

चर्चा है कि इनके तानाशाही रवैये से उपभोक्ताओं का भारी शोषण होता है। इतना है नही बिल बढ़ाकर बनवाने में भी इनका हाथ रहता है। जिसका जीता जागता प्रमाण दिनांक 04 फरवरी को तब देखने को मिला जब ये झिलाही रोड भगोहर स्थित कुछ कर्मचारियों के साथ एक उपभोक्ता के घर पहुंचे जिनका विद्युत बिल 27 जनवरी 2025 तक 3256 रुपये थे, जिसका मैसेज भी उपभोक्ता ने कर्मचारियों को दिखाया। जो शायद रत्नेश पांडेय को नागवार गुजरा और नियम कानून को ताक पर रखकर इनके द्वारा कुछ ही देर बाद मौजूद कर्मचारियों से 11 फरवरी 2025 तक के लिए 5198 रुपये बढ़ाकर मोबाइल पर मैसेज कर दिया, उवभोक्ता ने जब रत्नेश को फोन करके इसका विरोध किया तो उसने कहा कि ये पहले से होगा मुझे नही पता। इसके तुरंत बाद उपभोक्ता ने यूपीपीसी वेबसाइट पर अपना विद्युत बायोडाटा देखा तो इसी तारीख 11 फरवरी को ही 4149 रुपये बकाया दिखाया गया। जिससे साफ जाहिर होता है कि ज्यादा बिल बनाकर ये क्षेत्र में भोले भाले उपभोक्ताओं को गुमराह करके घर घर जाकर अपने तरीके से वसूली करते हैं। इस संदर्भ में जब जेई शिव कुमार से शिकायत की गई तो उन्होंने कहा कि ये मेरे वश में नही है, इसे एसडीओ साहब ही सही कर सकते हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि यहां के जेई की निष्क्रियता के चलते कुछ कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं जिसके चलते उपभोक्ताओं भारी शोषण हो रहा है। चर्चा है कि खास करके जो बिलिंग फीड करते हैं उनका भी मनमानी रवैया चलता है। यहां अहम विषय तो यह है कि क्षेत्र में इनकी वजह से ही उपभोक्ताओं को भारी समस्याओं से गुजरना पड़ता है और जब इसकी शिकायत जेई से की जाती है तो वो एक ही बात बोलते हैं कि ये मेरे वश में नही है एसडीओ साहब ही इसे कर सकते हैं। यहां सारी गलतियां इनकी निष्क्रियता से होती है और ये अपना सर का भार एसडीओ साहब के ऊपर छोड़ देते हैं।

पांच वर्षों से जमा है इसका अंगद रूपी पैर
बताया जाता है कि उपभोक्ताओं की दुश्वारियां बढ़ाने वाला ये इलेक्ट्रिशियन पांच वर्षों से वजीरगंज क्षेत्र में जमा हुआ है। उपभोक्ताओं की दुश्वारियां न बढ़े इसके लिए कर्मचारियों का फेरबदल होना जरूरी होता है, मगर इनका अंगद रूपी पैर पांच वर्षों से यहां जमा हुआ है।
